Tuesday, August 16, 2011

एक सच ये भी........

१.देशके मेगा स्टार अमिताभ बच्चन के पास समय ही समय ही शम्मी कपूर की मौत पे दुःख व्यक्त करने से , ब्लॉग लिखने से तथा उनके शव को कन्धा लगाने तक को पर उनकी व्यस्त जिंदगी में एक घंटा नहीं है अन्ना के साथ खड़े होने को या उनके समर्थन में कुछ बोलने को....ये हालत साले फिल्म कलाकारों की है...जब उनकी फिल्म पर प्रतिबन्ध लग जाती है तब समझ में आता है की हमारी स्वतंत्र का हनन हो रहा है लेकिन जब पूरा देश इस से गुजर रहा है तब उसके कान पर जूँ तक नहीं रेंगती.आपको भी पता है मिस्टर बच्चन की आप आएंगें तो आधा देश आ जाएगा पर अगर आपको अब भी अपने मेगा स्टार का लालच खीच रहा है तो भाँड में जाएये
२.विजय माल्या का कहना है की हमें टीम अन्ना का नहीं बल्कि टीम इंडिया का समर्थन करना चाहिए. आप ऐसा कह सकते हैं क्यूँ आप ही तो देश चला रहें हैं. आप राज्य सभा के सदस्य है सो बुद्धिजीवी होना आपका धर्म है, भले आपको आपने मनुष्य धर्म का ज्ञान हो न हो.कल शम्मीजी की शवयात्रा में अनिल अम्बानी भी शागिर्द थे पर देश बचाओ आन्दोलन में मुँह छिपाते फिरते हैं.
३.हमारी "इन्तेलिजेंसिया" इस सब्द के मायने भूल गयी है. उन दिमाग सिर्फ उनिवेर्सित्य की काम्पुस तक ही काम करता है और तब ही काम करता है जब उनके इगो की तुष्टि होती हुई नज़र आती है. करोड़ों का फंड इधर से उधर हो जाता है,पर विद्यार्थी हमेशा की तरह मुह बाए ही खड़े रह जाते है.इन्हें भी अन्ना का काम एक छलाबा ही लगता है .
४.हमारी वो सारी कन्याएँ जो की सलटवाक् -बेशर्मी का मोर्चा में खुल के भाग लेती हैं , उन्हें अन्ना के इस प्रदर्शन की जानकारी नहीं होती है क्या?जब आप खुद को "पूरा का पूरा" दिखाने को तैयार है इस बेशर्मी के मोर्चे के इए तो"गर्व के साथ अन्ना समर्थन " के लिए कम से कम चेहरा तो दिखा ही सकती है.

क्यूँ मिले भारत रत्न ?

भारत में" क्रिकेट के मसीहा","यूथ आइकन "तथा "कोहिनूर" से संबोधित किये जाने वाले मशहूर खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिलाने की कबायदें और तेज़ होती जा रही हैं.....पर ऐसा क्या कर डाला सचिन ने की अटल बिहारी वाजपेयी,सुब्रमण्यम स्वामी जैसे दिग्गज भी धराशाई होते नज़र आ रहे हैं? सचिन तेंदुलकर की देशभक्ति मैदान में घुसते के साथ और तिरंगा लगा हुआ हेलमेट पहनने के साथ ही शुरू होता है तथा मैदान से निकलते ही ये छू मंतर हो जाताहै.आज जब सारे देश की निगाह दूसरे स्वतंत्र संग्राम पे लगी है तब भी सचिन की दिन रात कोशिश है की १०० वां शतक कैसे पूरा हो ताकि जगह बची रहे वर्ना इस घटिया प्रदर्शन पे तो कपिल देव तक को नहीं बक्शा गया था.गौर तलब बात ये भी है की सचिन अपनी सहूलियत से खेलते हैं, समय की नजाकत से नहीं,ये सर्वविदित है.आये दिन कभी स्कुँद्रों लीडर तो कभी किसी और की उपाधि दी जाती है ये उनका सम्मान नहीं बल्कि उनका अपमान है जो इतनी कड़ी मेहनत के बाद उस उपाधि के लायक बन पाते हैं. अगर क्रिकेट खेलना ही सबसे बड़ी देशभक्ति है तो ऐसी देशभक्ति हर भारतीय करना चाहेगा.और देशभक्ति क्रिकेट खेलने तक ही सीमित है तो कल जब ये रिटायर्ड होंगे तो क्या इनकी जो भी देशभक्ति है, वो ख़त्म हो जाएगी. इतना कुछ हो जाने पे भी आपका एक भी बयान नहीं आता न ही आप खुल के अन्ना के समर्थन में बोलते हैं तो आप किस देशभक्ति का दंभ भरते हैं? जो लोग कहते हैं की संशोधन करके भी संविधान में सचिन को भारत रत्न मिले तो एक बार फिर से सोचें.हम सब को पता है अगर सचिन अन्ना के साथ खड़े हो जाएँ तो आधा भारत यूँ ही आ जाए पर "काश तो काश ही" है.