२.विजय माल्या का कहना है की हमें टीम अन्ना का नहीं बल्कि टीम इंडिया का समर्थन करना चाहिए. आप ऐसा कह सकते हैं क्यूँ आप ही तो देश चला रहें हैं. आप राज्य सभा के सदस्य है सो बुद्धिजीवी होना आपका धर्म है, भले आपको आपने मनुष्य धर्म का ज्ञान हो न हो.कल शम्मीजी की शवयात्रा में अनिल अम्बानी भी शागिर्द थे पर देश बचाओ आन्दोलन में मुँह छिपाते फिरते हैं.
३.हमारी "इन्तेलिजेंसिया" इस सब्द के मायने भूल गयी है. उन दिमाग सिर्फ उनिवेर्सित्य की काम्पुस तक ही काम करता है और तब ही काम करता है जब उनके इगो की तुष्टि होती हुई नज़र आती है. करोड़ों का फंड इधर से उधर हो जाता है,पर विद्यार्थी हमेशा की तरह मुह बाए ही खड़े रह जाते है.इन्हें भी अन्ना का काम एक छलाबा ही लगता है .
४.हमारी वो सारी कन्याएँ जो की सलटवाक् -बेशर्मी का मोर्चा में खुल के भाग लेती हैं , उन्हें अन्ना के इस प्रदर्शन की जानकारी नहीं होती है क्या?जब आप खुद को "पूरा का पूरा" दिखाने को तैयार है इस बेशर्मी के मोर्चे के इए तो"गर्व के साथ अन्ना समर्थन " के लिए कम से कम चेहरा तो दिखा ही सकती है.