Tuesday, August 16, 2011
क्यूँ मिले भारत रत्न ?
भारत में" क्रिकेट के मसीहा","यूथ आइकन "तथा "कोहिनूर" से संबोधित किये जाने वाले मशहूर खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिलाने की कबायदें और तेज़ होती जा रही हैं.....पर ऐसा क्या कर डाला सचिन ने की अटल बिहारी वाजपेयी,सुब्रमण्यम स्वामी जैसे दिग्गज भी धराशाई होते नज़र आ रहे हैं? सचिन तेंदुलकर की देशभक्ति मैदान में घुसते के साथ और तिरंगा लगा हुआ हेलमेट पहनने के साथ ही शुरू होता है तथा मैदान से निकलते ही ये छू मंतर हो जाताहै.आज जब सारे देश की निगाह दूसरे स्वतंत्र संग्राम पे लगी है तब भी सचिन की दिन रात कोशिश है की १०० वां शतक कैसे पूरा हो ताकि जगह बची रहे वर्ना इस घटिया प्रदर्शन पे तो कपिल देव तक को नहीं बक्शा गया था.गौर तलब बात ये भी है की सचिन अपनी सहूलियत से खेलते हैं, समय की नजाकत से नहीं,ये सर्वविदित है.आये दिन कभी स्कुँद्रों लीडर तो कभी किसी और की उपाधि दी जाती है ये उनका सम्मान नहीं बल्कि उनका अपमान है जो इतनी कड़ी मेहनत के बाद उस उपाधि के लायक बन पाते हैं. अगर क्रिकेट खेलना ही सबसे बड़ी देशभक्ति है तो ऐसी देशभक्ति हर भारतीय करना चाहेगा.और देशभक्ति क्रिकेट खेलने तक ही सीमित है तो कल जब ये रिटायर्ड होंगे तो क्या इनकी जो भी देशभक्ति है, वो ख़त्म हो जाएगी. इतना कुछ हो जाने पे भी आपका एक भी बयान नहीं आता न ही आप खुल के अन्ना के समर्थन में बोलते हैं तो आप किस देशभक्ति का दंभ भरते हैं? जो लोग कहते हैं की संशोधन करके भी संविधान में सचिन को भारत रत्न मिले तो एक बार फिर से सोचें.हम सब को पता है अगर सचिन अन्ना के साथ खड़े हो जाएँ तो आधा भारत यूँ ही आ जाए पर "काश तो काश ही" है.
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